सरोगेसी : निःसंतान दम्पत्तियों के लिए उम्मीद की एक किरण !

सरोगेसी : निःसंतान दम्पत्तियों के लिए उम्मीद की एक किरण !

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Dr. Rita Bakshi Chair Person International fertility Centre बांझपन दुनिया भर में माता-पिता बनने का सपना देखने वाले लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ...

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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार विषयः भारत में आपातकालीन मेडिसन एवं चिकित्सा
मंत्रिमंडल ने स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल और आरोग्‍य के क्षेत्र में भारत और जापान के बीच समझौता ज्ञापन (एमओसी) को मंजूरी दी

Dr. Rita Bakshi
Chair Person
International fertility Centre

बांझपन दुनिया भर में माता-पिता बनने का सपना देखने वाले लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। हालाँकि मेडिकल साइंस ने आईवीएफ के माध्यम से बांझपन या इनफर्टिलिटी की समस्या पर काबू पाने में सफलता पा ली किन्तु फिर भी बार-बार होने वाला गर्भपात या लगातार होने वाले implantion Failures जैसी समस्याएं सामने आने लगीं! साथ ही कई बार ऐसा भी होता है की किसी कारण के चलते महिलाओं के लिए गर्भ धारण करना संभव नहीं हो पाता!
अब इस प्रकार की सभी समस्याओं से पार पाने के लिए Assisted Reproduction की एक और तकनीक का जन्म हुआ जो की सरोगेसी (Surrogacy) के नाम से जानी जाती है! सरोगेसी प्रक्रिया उन सभी महिलाओं को उम्मीद की एक किरण है जो स्वयं Pregnancy Carry करने में असमर्थ हैं!
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आइये समझने की कोशिश करते हैं की ये सरोगेसी प्रक्रिया आखिर है क्या ?
आसान शब्दों में कहें तो सरोगेसी का मतलब है कि बच्चे के जन्म तक एक महिला की ‘किराए की कोख’ ! सरोगेसी की प्रक्रिया में कोई और महिला ( Surrogate ) आपके लिए Pregnancy Carry करती है! ऐसा होने वाले माता-पिता और Surrogate के बीच हुए समझौते के माध्यम से किया जाता है! इस व्यवस्था में होने वाले माता-पिता के शुक्राणु (Sperm) और अंडे (Egg) का प्रयोग करते हुए एक प्रयोगशाला में भ्रूण (Embryo) बनाकर किया जाता है और फिर इस भ्रूण को सरोगेट के गर्भ में स्थानांतरित (implant) कर दिया जाता है। सरोगेट 9 महीनों के लिए गर्भावस्था में होती है और प्रसव के बाद बच्चे को अपेक्षित माता-पिता (Intended Parents) को सौंप दिया जाता है। सरोगेसी के माध्यम से जन्मे बच्चे जैविक रूप से Intentded Parents में से किसी एक या फर दोनों से संबंधित होते हैं , न कि Surrogate से।
यह पूरी प्रक्रिया एक कानूनी समझौते के माध्यम से होती है और होने वाले बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र पर Intended Parents का नाम होता है ताकि भविषय में भी Intended Parents को किसी तरह की समस्या ना हो!
भारत में Commercial Surrogacy को 2002 में कानूनी रूप से मान्यता मिली थी और उसके बाद से यहाँ surrogacy के लिए मेडिकल टूरिज्म में लगातार वृद्धि हो रही थी पर यहाँ आपको यह भी बताते चलें की सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2016 के अनुसार भारत में अब अविवाहित पुरुष या महिला, सिंगल, लिव-इन रिलेश्नशिप में रहने वाले जोड़े और विदेशी जोड़े जो भारत के नागरिक नहीं हैं इन सब के लिए सरोगेसी वैध नहीं है !

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