माइग्रेन का इलाज कैसे किया जा सकता है?

माइग्रेन का इलाज कैसे किया जा सकता है?

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माइग्रेन से राहत पाने के लिए कई तरीके आज़माए जा सकते हैं।* उदाहरण के लिए, माइग्रेन के दर्द की सबसे अच्छी दवा है नींद। इसके अलावा दवाई की दुकानों में जो...

स्पाइन यानि रीढ़ की चोट के मामले में समय पर इलाज के द्वारा मरीज़ को बचाया जा सकता है, अपोलो हाॅस्पिटल्स के विशेषज्ञों ने बताया
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माइग्रेन से राहत पाने के लिए कई तरीके आज़माए जा सकते हैं।* उदाहरण के लिए, माइग्रेन के दर्द की सबसे अच्छी दवा है नींद। इसके अलावा दवाई की दुकानों में जो दर्द-निवारक गोलियाँ मिलती हैं उनसे भी शायद पीड़ित व्यक्‍ति को इतनी राहत मिल जाए कि वह सो सके।

सन्‌ 1993 में खास तौर से माइग्रेन के इलाज के लिए दवाइयों के एक नए वर्ग की ईजाद हुई, जिन्हें ट्रिपटन्स का नाम दिया गया। द मेडिकल जर्नल ऑफ ऑस्ट्रेलिया पत्रिका ने दवाइयों के इस वर्ग को “इलाज में एक बड़ी तरक्की” कहा। उस पत्रिका में यह भी लिखा गया कि “माइग्रेन और क्लस्टर नाम के सिरदर्द के लिए ट्रिपटन्स . . . की खोज उतनी ही असरदार है जितनी कि जीवाणुओं से होनेवाले संक्रमण पर पेनिसिलिन की!”

माइग्रेन जानलेवा बीमारी नहीं है। इसलिए भले ही माइग्रेन की दवाई संक्रमण की दवाई की तरह लोगों की जान न बचाती हो, फिर भी ट्रिपटन्स ने उन लोगों को राहत पहुँचायी है जो बरसों से माइग्रेन का दर्द बरदाश्त कर रहे हैं और जिनके काम पर इसका बुरा असर पड़ रहा था। यह दवाई लेने के बाद भी लोगों को अपने कामों में फेरबदल करने की ज़रूरत है जैसा कि इस लेख में बताया गया है। लेकिन माइग्रेन से पीड़ित कुछ लोगों ने ट्रिपटन्स को चमत्कारिक दवा कहा है।

फिर भी हर दवाई के अपने फायदे और नुकसान होते हैं। ट्रिपटन्स के मामले में कुछ बातें अखरती हैं। कौन-सी बातें? पहली बात, ट्रिपटन्स की एक गोली ही इतनी महँगी होती है कि उतने पैसे में आप किसी अच्छे रेस्तराँ में खाना खा सकते हैं। इसलिए यह उन लोगों को नहीं दी जाती जिन्हें माइग्रेन का हल्का दर्द उठता है। साथ ही, ट्रिपटन्स सभी को राहत नहीं पहुँचाती और ऐसे लोगों को यह दवाई नहीं दी जा सकती जिन्हें कोई दूसरी बीमारी होती है। हालाँकि माइग्रेन के शिकार लोगों को अपने माता-पिता से जो बीमारी मिली है उसका कोई इलाज नहीं है लेकिन एमरजेंसी मेडिसिनपत्रिका कहती है: “माइग्रेन के लिए नयी और पहले से बेहतर दवाइयाँ आ गयी हैं जिस वजह से अब ज़्यादातर लोगों को इसके दर्द से तड़पने की ज़रूरत नहीं है।”

माइग्रेन से राहत पाने के लिए कई तरीके आज़माए जा सकते हैं।* उदाहरण के लिए, माइग्रेन के दर्द की सबसे अच्छी दवा है नींद। इसके अलावा दवाई की दुकानों में जो दर्द-निवारक गोलियाँ मिलती हैं उनसे भी शायद पीड़ित व्यक्‍ति को इतनी राहत मिल जाए कि वह सो सके।

सन्‌ 1993 में खास तौर से माइग्रेन के इलाज के लिए दवाइयों के एक नए वर्ग की ईजाद हुई, जिन्हें ट्रिपटन्स का नाम दिया गया। द मेडिकल जर्नल ऑफ ऑस्ट्रेलिया पत्रिका ने दवाइयों के इस वर्ग को “इलाज में एक बड़ी तरक्की” कहा। उस पत्रिका में यह भी लिखा गया कि “माइग्रेन और क्लस्टर नाम के सिरदर्द के लिए ट्रिपटन्स . . . की खोज उतनी ही असरदार है जितनी कि जीवाणुओं से होनेवाले संक्रमण पर पेनिसिलिन की!”

माइग्रेन जानलेवा बीमारी नहीं है। इसलिए भले ही माइग्रेन की दवाई संक्रमण की दवाई की तरह लोगों की जान न बचाती हो, फिर भी ट्रिपटन्स ने उन लोगों को राहत पहुँचायी है जो बरसों से माइग्रेन का दर्द बरदाश्त कर रहे हैं और जिनके काम पर इसका बुरा असर पड़ रहा था। यह दवाई लेने के बाद भी लोगों को अपने कामों में फेरबदल करने की ज़रूरत है जैसा कि इस लेख में बताया गया है। लेकिन माइग्रेन से पीड़ित कुछ लोगों ने ट्रिपटन्स को चमत्कारिक दवा कहा है।

फिर भी हर दवाई के अपने फायदे और नुकसान होते हैं। ट्रिपटन्स के मामले में कुछ बातें अखरती हैं। कौन-सी बातें? पहली बात, ट्रिपटन्स की एक गोली ही इतनी महँगी होती है कि उतने पैसे में आप किसी अच्छे रेस्तराँ में खाना खा सकते हैं। इसलिए यह उन लोगों को नहीं दी जाती जिन्हें माइग्रेन का हल्का दर्द उठता है। साथ ही, ट्रिपटन्स सभी को राहत नहीं पहुँचाती और ऐसे लोगों को यह दवाई नहीं दी जा सकती जिन्हें कोई दूसरी बीमारी होती है। हालाँकि माइग्रेन के शिकार लोगों को अपने माता-पिता से जो बीमारी मिली है उसका कोई इलाज नहीं है लेकिन एमरजेंसी मेडिसिनपत्रिका कहती है: “माइग्रेन के लिए नयी और पहले से बेहतर दवाइयाँ आ गयी हैं जिस वजह से अब ज़्यादातर लोगों को इसके दर्द से तड़पने की ज़रूरत नहीं है।”

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